120Log inSign up
Poem · Abstract

हर बार की तरह...

by Stuti Singh ✓ · 30 Jan 2021

244Reads
21Likes
1Min read

उसने लूटा ,हम लुट गए हर बार की तरह, बाद में आंसू मिले हर बार की तरह।

Loading comments…

हर बार की तरह... · StoryMirror