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Poem · Others

इंसानियत

by Sadhna Shrivastava ✓ · 26 Aug 2017

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घटते हुए नैतिक मूल्य से इंसानियत शर्मसार हो रही है, इन्ही भावो को समेटे हुए मैंने इस कविता की रचना की है... 

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इंसानियत · StoryMirror