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#introspection
4 poems
मृगतृष्णा
Pragya Kant · 1 min read · 37 reads
अपितु कृष्णा है ! वचन कर्म विहीन हो तोये मिथ्या है मृगतृष्णा है !
Abstract
बहुत दिन हो गए
Pankaj Prabhat · 1 min read · 222 reads
खुद मैं जज्ब किये थे जो सपने पंकज, उन सपनों को कभी खोल कर नहीं देखा।
Drama
बरखा
Diwakar Pokhriyal · 1 min read · 21 reads
अब तक समझ ना पाया कोई, इससे क्या रिश्ता हमारा है ?
Drama
मेरे जैसा कौन बनेगा ?
Disha Puri · 1 min read · 149 reads
अगर मैं तुम जैसी बन भी गयी तो मेरे जैसा कौन बनेगा ?
Abstract