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1903 poems
- एक प्यासा लम्हा रीत गयाAnkur Govind · 1 min read · 7K readsचलते -चलते क्यों लगता है, एक अरसा यों ही बीत गया लगता है पानी के घट से ,एक प्यासा लम्हा रीत गया
झड़ते पत्ते यह कहते है, मौसम का हाल बदलता है पर रोज़-रोज़ यों लगता है, सूरज तो पीछे चलता है
तुम गऐ तुम्हारे साथ गया, उस प्यारे बचपन का आँगनअब फ़ीका -फ़ीका सा, लगता, जीवन का हर कोई बंधन
तेरे काँधे पर सर रखकर, हाँ कितनी रातें काटी हैं सन्नाटों में यह लगता है यह घड़ियाँ हमने बाँटी हैं
अब नई कोपलें खिलती है,तो सकुचाता है मेरा मन आती है कई बहारें भी ,पर ना जाता यह सूनापन Others
- उनका मुङकर देखनाRajiv Jiya Kumar · 1 min read · 227 readsभूल पाता नहीं अब तो
आपका मुड़कर मुझे देखना।Romance
- आज़ादीChetan Chakrbrti · 1 min read · 2 readsहै आज जरूरी लड़ ले हम
अपनी लड़ाईअपने वास्ते।
जो फैली है भ्रष्टाचार की
बीमारी हमारी वAbstract
- तुझकोHimanshu Sharma · 1 min read · 367 readsबड़ी हसरत से देखती है ये नज़र तुझको,
देख के रुक जाता घड़ी का गज़र तुझको!Abstract
- ☆ आज तुम याद आए ☆============Rajiv Jiya Kumar · 1 min read · 189 readsछीन लिया न सुन फरियाद
आए आज फिर तुम याद।Abstract
- रिश्ता....!ajad_e_kalam . · 1 min read · 422 readsअनुभव का सम्मान रहेगा,
सब निर्णय के हर क्षण क्षण पर..Romance
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