- एक प्यासा लम्हा रीत गयाAnkur Govind · 1 min read · 7K readsचलते -चलते क्यों लगता है, एक अरसा यों ही बीत गया लगता है पानी के घट से ,एक प्यासा लम्हा रीत गया
झड़ते पत्ते यह कहते है, मौसम का हाल बदलता है पर रोज़-रोज़ यों लगता है, सूरज तो पीछे चलता है
तुम गऐ तुम्हारे साथ गया, उस प्यारे बचपन का आँगनअब फ़ीका -फ़ीका सा, लगता, जीवन का हर कोई बंधन
तेरे काँधे पर सर रखकर, हाँ कितनी रातें काटी हैं सन्नाटों में यह लगता है यह घड़ियाँ हमने बाँटी हैं
अब नई कोपलें खिलती है,तो सकुचाता है मेरा मन आती है कई बहारें भी ,पर ना जाता यह सूनापन Others
- ☆ आज तुम याद आए ☆============Rajiv Jiya Kumar · 1 min read · 189 readsछीन लिया न सुन फरियाद
आए आज फिर तुम याद।Abstract
- रिश्ता तुमसे हैRajiv Jiya Kumar · 1 min read · 179 readsरिश्ता तुमसे तो है न कोई
बतला दो यह क्या कहलाता है।।Abstract
- मंजिलAmit Sharma · 1 min read · 318 readsएक मंजिल की तलाश में कुछ दूर चला आया हूँ मैं!Abstract
- ज़िन्दगीSachin Singh · 1 min read · 168 readsएक दूसरे की न साथ छोड़े हम
आओ आपस मे प्यार करे हम।Drama
- कुछ रूप ज़िन्दगी केमहेश 'ज्योति' · 1 min read · 230 readsजिन्दगी फासला है मंजिल का,
जिसको तय करते उम्र कट जाती।Inspirational
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