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Poem · Abstract

इत्र की शीशी

by अभिषेक कुमार 'अभि' ✓ · 17 Sept 2019

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ख़ुदी मिटा कर दूजों को अपनाती हूँ मैं, फिर भी किसी के ध्यान कभी नहीं आती हूँ मैं।

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इत्र की शीशी · StoryMirror