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by Mukesh MACजरूरी है
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दरकती दीवारों की मरम्मत जरुरी है।

घर के बुजुर्गों से मोहब्बत जरुरी है।।

तुमने तो करवा लिया बीमा अपना-

पर पूछना उनकी तबियत ज़रूरी है।


 बना लो दोस्त कई सारे लेकिन 

भाइयों का साथ भी जरूरी है 

बैठ जाओ बेशक किसी हसीना की 

जुल्फों मे लेकिन बाप के पसीने का

 हिसाब भी जरूरी है 


उन्हे भी हक है जश्न-ए-रोशनाई का-

हमारी धरोहरों की जीनत जरुरी है।

थामा था जिन्होंने तुम्हारा नन्हा हाथ-

उन कांपते हाथों को हिम्मत ज़रूरी है।

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