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#kamilkavikunu
25 poems
तुम्हारा प्रेम हूँ मैं
Kunal kanth · 1 min read · 185 reads
हमदोनों है पूर्ण एकदूसरे के साथ ये आकाश ये कायनात साक्ष्य में रचते इतिहास की गाथा हमा
Drama
ईश्क को जिस्म लिखते हो
Kunal kanth · 1 min read · 195 reads
अब तो बता दो माजरा क्या है मियां तुम कब्र से क्या कहते हो।
Drama
डगर कितनी भी कांटों में हो
Kunal kanth · 1 min read · 546 reads
ख़ामोश हो तुमने वजूद को भी नीलम कर रखा है।
Abstract
तुम मेरी
Kunal kanth · 1 min read · 199 reads
सुन लो करुणा पुकार मेरी मैं तुम्हारा तुम अर्धांगिनी हो स्रष्टि के अंत तक मेरी।
Romance
मैं बड़ा हुआ
Kunal kanth · 1 min read · 324 reads
मगर कौन जाने ख्वाबों को मूंद कहीं एक सूर्य अस्त भी हुआ।
Drama
अनुरागी मन
Kunal kanth · 1 min read · 300 reads
अस्त्वित्व् , बदन, लफ्ज , साँस, स्मृति,अभिलाषा प्रेम , जीवन और शाम सुबह।
Romance
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