by Arti Tiwari ✓ · 6 Aug 2017
तुम्हारी नोटबुक में चकित विस्मित दरीचों की ओट से पढ़ता तुम्हारा लिखा विस्फारित नेत्रों से तलाशता अपना नाम कहीं न था नोटबुक में जो उसे ही पढ़ने की ज़िद!
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