120Log inSign up
by Upama Darshanखामोशियां
Details

खामोशियों से बातें मेरी आज यूँ होने लगीं

रुबरु मुझसे मेरी तन्हाइयाँ होने लगीं

दिल के तार छिड़ गए वीणा हो ज्यों झंकृत हुई

मौन की भाषा मेरी कुछ इस तरह मुखरित हुई


बर्फ ज्यूँ पिघली हो ऐसे यादें सब बहने लगीं

सरगोशियाँ मुझसे मेरी खामोशियाँ करने लगीं

शिकवे गिले आँखों की कोरों को भिगोने जब लगे

थपकियाँ हौले से दे - वे लोरियाँ गाने लगीं


आगोश में ले वे

मुझे सपनों में ले जाने लगीं

फलसफ़ा जिंदगी का

खामोशियाँ समझाने लगीं...!

Loading comments…