120Log inSign up
Poem · Abstract

खुश्बू मेरे गाँव की

by Shamim Shaikh ✓ · 15 Apr 2021

322Reads
26Likes
1Min read

शहरों में होती चहल-पहल पर देस में जाता है वक़्त ठहर हाँ याद है हमें वो कच्ची मिट्टी के घरों के पनाहों की वो खुश्बू मेरे गाँव की !

Loading comments…

खुश्बू मेरे गाँव की · StoryMirror