नये सफर का नया कदम है,
ख्याल उनका उन्हीं का गम है।
मिलन का अरमां लिये चले पर,
हमारी चाहत का ये भ्रम है।
कभी था हमसे रुसुखो निस्बत
उसी पे मजमर लगा जन्म है,
मचल रहे सब हसीन जज्बे,
पसे इनायत दबा करम है।
वफा निभाने के पाले अरमां,
बढ़ा ये मासूम रंजो अलम है।।
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