120Log inSign up
Poem · Tragedy

कलम खामोश थी

by Kshitij Bhatt ✓ · 20 Dec 2018

11KReads
30Likes
2Min read

अगले दिन छपकर आया यह अखबारों में, पत्रकार का खून लगा है कुछ 'अज्ञातों' की तलवारों में।

Loading comments…

कलम खामोश थी · StoryMirror