by Ravikant Raut ✓ · 25 Aug 2017
मुर्दा मज़ारों , इबादत-ख़ानों की मरमरी दीवारों , समाधी के पत्थरों , अरे !! चूमने की तुम्हें तो , रवायत है यहां , रब के बनाये ज़िन्दा किसी शाहकार को चूम लें तो , क्यूं हाहाकार होता है ॥
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