जब उसको खंजर के
समक्ष लिटाया होगा....
दिल ओ दिमाग में क्या
संघर्ष पाया होगा...
जब बेटे के समक्ष
माँ को नग्न अवस्था में
लाया होगा..
उस वक्त उस बालक को
क्या एहसास आया होगा...
इतना दर्द
इतना दर्द...
मुँह में शिव ....
मंज़र खौफनाक...
दो टुकड़ों में
बंट ता सा गया
शरीर...
और इंसान
बस खड़ रहा...
हे इंसान
तेरी चाहत है क्या....
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