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#kunu
17 poems
ईश्क को जिस्म लिखते हो
Kunal kanth · 1 min read · 195 reads
अब तो बता दो माजरा क्या है मियां तुम कब्र से क्या कहते हो।
Drama
संवाद
Kunal kanth · 1 min read · 201 reads
मगर प्रेम में अर्पित आवारा सा नैन स्पर्श की ताक में हूँ।।
Drama
तुम्हारा प्रेम हूँ मैं
Kunal kanth · 1 min read · 185 reads
हमदोनों है पूर्ण एकदूसरे के साथ ये आकाश ये कायनात साक्ष्य में रचते इतिहास की गाथा हमा
Drama
ग़जलों का साज
Kunal kanth · 1 min read · 343 reads
आसमां को दिखाने अब अपनी रात करना चाहूं।
Abstract
खास
Kunal kanth · 1 min read · 190 reads
बिन धड़कन भी तेरे संग एक जां है कैसे कह दूं तू कितनी ख़ास है।
Drama
डगर कितनी भी कांटों में हो
Kunal kanth · 1 min read · 546 reads
ख़ामोश हो तुमने वजूद को भी नीलम कर रखा है।
Abstract
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