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Poem · Comedy

कुत्तानियत

by jitendra shivhare ✓ · 1 Aug 2018

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तुम्हे काटा इसलिए कहीं तुम हमको लालची, कायर की परख में उलझ न जाओ छोड़ इसलिए रहे है, नमक का फर्ज हम अब भी अदा करते है, ...

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कुत्तानियत · StoryMirror