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Poem · Tragedy

क्या समझा और क्या निकले

by हरि शंकर गोयल "श्री हरि" ✓ · 4 Dec 2021

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जिन्हें हम फौलाद समझते रहे वो मोम से भी ज्यादा तरल निकले ।

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क्या समझा और क्या निकले · StoryMirror