by AJAY AMITABH SUMAN ✓ · 8 Jul 2019
प्रभु कहने से ये डरता हूँ, तुझको अपमानित करता हूँ , इनके भीतर तू हीं रहता, फिर जोर तेरा क्यूँ ना चलता? ये बात समझ ना आती है, किंचित विस्मित कर जाती है, क्यों कुछ नर ऐसे होते हैं, प्रभु क्यों नर ऐसे होते हैं?
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