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by AMIT KUMAR SAHUलेखक
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ज़िन्दगी एक बार मिलती है

हज़ारों बरबादियाँ इसके साथ मिलती हैं।

बर्बादियों के बाद भी उठ के खड़े हो तुम 

तो सफल हो तुम।

बर्बादियों के साथ ही मुस्कुराते

हो तुम

तो बेशक एक लेखक हो तुम।।

   

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