by Geeta Upreti Gupta ✓ · 3 Aug 2018
उठती गिरती बहती लहरें जाने क्या-क्या कहती लहरें गूँज रहा बस शोर तुम्हारा बाकी सब कुछ बिसर गयी मैं माला से...!
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