किन अल्फाज़ से ओ माँ,
तेरी ममता का बखान करूँ l
किन शब्द से ओ माता,
तेरे त्याग का गुणगान करूँ l
किस धुन से ओ प्यारी माँ,
तेरी महिमा का गान करूँ l
कैसे अपने कलुषित मन से,
तेरे निस्वार्थ प्रेम का मान करूँ l
कैसे ममता का मोल चुकाऊं,
क्या तुझ पर माँ, बलिदान करूँ l
थोड़ी सी भी खुशियाँ दे सके,
माता, क्या मैं वो सब काम करूँ l
तेरी ही बदौलत है जीवन मेरा,
अपनी हर साँस तेरे नाम करूँ l
तेरी एक मुस्कान के लिए अब,
जतन वो अब मैं तमाम करूँ l
माँ, तुझ पर बलिहारी जाऊँ,
सौ जन्म तुझ पर कुर्बान करूँ l
हर लम्हा, हर पल, हर क्षण,
माँ, मैं तो तेरा ही ध्यान करूँ l
ना जानू मैं तो उस खुदा को,
आराधना तेरी सुबह शाम करूँ l
तेरे जैसी सभी माताओ को,
मैं तो दंडवत प्रणाम करूँ l
:-✍️Arya Vijay Saxena
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