
मानव को समझना हमेशा ही जटिल रहा है, मनुष्य का अपने को सर्वश्रेष्ठ समझने का दंभ भी पहले से ही मजबूती से समाज में व्याप्त हैं, ऐसे में एक नए विचार से सोचना पहले से अपनी मजबूत जड़े बना चुके विचारों को हिलाने की कल्पना करने की कोशिश करता है। कविता पढ़कर आप कुछ सोच पाए मानव के मतलब पर या अपनी सोच से तुलना कर पाए या इस नज़रिए को स्वतंत्र पहचान ही दे, ये कविता मानव होने के मतलब को नया आयाम देने की कोशिश करती है, आप अपनी सहमति या असहमति बनाए पर ये दावा है कि ये कविता आपके विचारों की इमारत को हिला ज़रूर देगी।
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