
नारी अनेक भूमिकाऐंं निभाती है, कभी माँ, कभी बहन, कभी पत्नी, कभी बेटी । इस शक्ति स्वरूपा की सबसे विशिष्ट बात है इसके अंदर कभी न समाप्त होने वाला धैर्य । किन्तु आज नारी को इस धैर्य की परीक्षा हर कदम पर देनी पड़ती है । लेकिन अब समय आ गया है जब वह पूरे विश्व को अपना दूसरा रूप दिखाऐ और वह प्रतिष्ठित स्थान प्राप्त करे जिसकी वह सच्ची हक़दार है ।
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