by Anand Ranjan ✓ · 26 Jul 2019
सपनों का आशियाँ गर तुम भी बनाते तो जान लेते की मैं क्या चाहता हूँ हिचकियाँ तेरी अगर बोल पातीं राज़ गर वो कुछ खोल पातीं नजदीकियां गर थोड़ी तुम भी बढ़ाते तो जान लेते की मैं मैं क्या चाहता हूँ
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