by Uday Pratap Dwiwedi ✓ · 22 Aug 2017
मैं अन्धकार में हूँ पर तुम्हारा भविष्य हूँ कल का कर्णधार हूँ पर आज अदृश्य हूँ मैं सपने सजोता हूँ फिर उन्हें टूटते देखता हूँ पर मै टूटा नहीं हूँ फिर से खड़ा होने को गिरा हूँ मैं युवा हूँ
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