by Sunita Jain ✓ · 3 Aug 2017
ब्रहमांड में माँ ही तो है जो हम सबकी अलग- अलग होकर भी एकसी होती है... माँ स्वयं सृष्टी है ,इसलिए हर अनुभव कहता है ,माँ तो माँ होती है! इस कविता में यही भाव उकेरे हैं कि मैंने पूरी दुनिया को अलग देखा है पर माँ को एकसा-----
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