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#mann
4 poems
"घ"
Nikhil Sharma · 1 min read · 6.8K reads
"घ" से वो "घनघोर" "घटाऐं" जो आसमान में छाती है "घिर" आती जब आसमान में "घना" अँधेरा लाती है "घोर" बरखा लाती है वो, मन को वो हर्षाती है "घ" से ही वो "घना" सा वन है जहाँ "घर " है जीवन का, जहाँ प्रकृति "घरौंदा" बनाती है "घ" से वो "घातक" सच है, जो हममें "घृणा" लाता है "घ" से ही है वो "घर" जहाँ जीवन पर्याय पता है "घ" से ही है वो "घोंसला" जहाँ चिड़िया नऐ परिंदे लाती है "घ" से है वो "घमासान" जी मन में उत्पात मचाता है "घ" से है वो "घोषणाऐं" जो चुनावों में की जाती है "घ" से ही है वो "घाव" जो ये वेदनाऐं दे जाते हैं "घ" से ही है वो "घमंड" जो हमें अहम् के "घेरे" में "घेर " देता है
Others
अनलिखी_कविता
Anita Sharma · 1 min read · 572 reads
छुपे मुझमें ही कहीं बनकर मेरी एक अनलिखी_कविता।
Abstract
उल्फत
Maan Bindu · 1 min read · 228 reads
आप बोलो और हम सुनते रहें, कुछ ऐसा हो आलम।
Romance
बात पते की
Anita Sharma · 1 min read · 423 reads
बात पते की याद ये रखना अब पशुता इंसान दिखलायेंगे।
Drama