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by Pandit Dhirendra Tripathiमेरा ये ख्वाब है
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मेरे ये ख्वाब है कि मैं मक्का मदीना देखूं

आदमजात को होते सीन पासीना देखूं


करता है हलाला अपनी ही बहू बेटियों से जो

कैसे बचता है ख़ुदा के दर पर वो कमीना देखूं ?


मेरा ये ख्वाब ...............


कहाँ से आया वो किताब जिसमें ग़ैरधर्मी हराम लिखा है

हलाल को सुन्नत बातया तो मजहब क्यों इस्लाम लिखा है


क्या सच में मोहम्मद ने जिहाद को ईमान बाताया था

फ़तवे कहा से शुरू हुए जाके वो सफ़ीना देखूं


मेरा ये ख्वाब ...............


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