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by Sameer Kumarमेरी बेचैन आत्मा
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मौत के दर से,

अपने पर पे तूने मुझको बिठाया

ज़िंदगी की दौड़ में तूने मुझको जिताया

जाना था अगर तुझे

मेरे दिल में दीप क्यों जलाया ?


बतलाओ ना ए मेरी दिलरूबा !

बतलाओ ना ए मेरी हमनवा !


क्या मेरी बातें

क्या मेरे वादे

में दिखती है बेवफाई ?


क्या हमारे रिश्ते में है तन्हाई ?

बतलाओ ना ए मेरी दिलरूबा !

बतलाओ ना ए मेरी हमनवा !


क्या मेरे कारण तुम्हारा दिल टूटा ?

क्या मेरे कारण तुमहारा सपना टूटा ?

क्या मेरे कारण तुम्हारा नसीब रूठा ?


बतलाओ ना ए मेरी दिलरूबा !

बतलाओ ना ए मेरी हमनवा !

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