by Monika Garg ✓ · 30 Jan 2019
नहीं सखी मैं कैसे रूठ सकती हूँ, तेरे दिल का हाल मे खूब समझती हूँ। दिल तेरा रोता है आँसू मेरे निकलते हैं, तेरे हर ज़ख्म मे
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