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#migrantworkers
5 poems
मै परियाई श्रमिक हू
Antariksha Saha · 1 min read · 193 reads
मीलों का फासला तय करने निकल पड़े क्यों कि घर पे बैठे मरने से बेहतर रास्ते मे दम तोड़ना
Tragedy
लेबर चौराहा और कविता
Prabhanshu Kumar · 1 min read · 1.3K reads
देखती है आवाजों के साथ मुस्कराता शहर का असली आईना कविता न उठाती है हथियार न लहराती है परचम वह धीरे-धीरे...
Drama
मजदूरों के हालात बयां करने वाल
Wasim Khan · 1 min read · 339 reads
अब तो हुकूमत ने भी के दिया आत्मनिर्भर बनो लगता है हुकूमत का भी ज़मीर मर गया।
Classics
महामारी और मजदूर
Shyamli Sinha · 1 min read · 170 reads
भारी भरकम भीड़ लिए कुछ लोग मदद को आते हैं अपनी मीठी बातों से फिर सबको भरमाते हैं .
Tragedy
सुरक्षा की उड़ान
Ananya Singhal · 1 min read · 438 reads
व्यवस्था परिवर्तन का समय आया है सुरक्षा की महत्वता का ज्ञान पाया है ।
Inspirational