120Log inSign up
Poem · Drama

मिट गया है तन

by अजय जयहरि कीर्तिप्रद ✓ · 21 Aug 2018

26.8KReads
5Likes
1Min read

जो उसने चाहा हो गया डर भी डरकर सो गया। ख्वाब था कब से अधूरा पलभर में पूरा हो गया।

Loading comments…

मिट गया है तन · StoryMirror