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by Ankit Singhमकान
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कुछ दिनों से

राख बिखरे पड़े हैं

मेरे ज़मीर पे

कमबख़्त कोई आता नहीं

अब उसे उठाने !

मकान मेरा

अब श्मशान - सा लगने लगा है...।


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