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#mothernature
343 poems
तेरे आँचल में
नवल पाल प्रभाकर दिनकर · 1 min read · 6.7K reads
कौन कहता है पत्थर नही रोता रोता तो बहुत है मगर उसके रोने का हमें एहसास नही है होता...।
Drama
प्रकृति देवी
नवल पाल प्रभाकर दिनकर · 1 min read · 13.6K reads
जा रहा हूं हे प्रकृति देवी हंसकर मुझे तुम विदा करो।
Drama
City Bus
Sourbh Doke · 2 min read · 215 reads
पता नहीं ये धरती कब तक हमारा बोझ सह पायेगी!
Abstract
प्रकृति गीत
Priti Chaudhary · 1 min read · 629 reads
प्रभात का वर्ण है स्वर्णिम लाल, रक्तिम गुलाल युक्त है संध्या काल!
Abstract
माँ
माँ
Akanksha Bhatnagar · 1 min read · 7.3K reads
मैं दिल की धड़कन हूँ मेरा पूरा दिल है माँ
Comedy
माँ
Qais Jaunpuri · 1 min read · 6.8K reads
आँचल में छिपाके रखती है माँ कितनी तकलीफ़ें सहती है फिर भी हम बच्चे तुझे ज़िन्दगी भर सताते हैं और तुझे बुढ़ापे में अकेला छोड़ जाते हैं हमारी तरफ़ से अपना दिल साफ़ करना माँ, हो सके तो हमें माफ़ करना
Children
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