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Poem · Drama

मुक्तक

by Dr. Prakhar Dixit ✓ · 9 Aug 2018

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प्रणय की हूँ सघन बदरी, अमापित नीर वाही मैं.. सतत जल से भरी रहती, निरन्तर जब बरसती हूँ।

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मुक्तक · StoryMirror