मुरली मनोहर बासुरी वाले
बासुरी के धुन पर दुख हरने वाले
मोर मुकुट सर पर धरने वाले
नटखट से नंदलाल।
मैया को सताते हो
ऊनको खुब खेल खेलाते हो
दौड़ा दौड़ा के उन्हे थकाते हो
मेरे नटखट से नंदलाल।
बासुरी बजा गोपियो को लुभाते हो
राधा संग लीला दिखाते हो
मेरे नटखट से नंदलाल।
तुम्हारी लीला है निराली
कब पासा पलटा दो
पता ही नही चलता
नटखट से मेरे नंदलाल।
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