
सपने हर कोई देखता है पर उसे पूरा करने के लिए कुछ ही लोग दूर तक चल पाते हैं। जो रुक जाते हैं, किसी और प्रकार के रंगीनियों के लिए सपने को भूल जाते हैं। जब वापस सपनो की राह पर आते हैं तो बहुत देर हो चुकी होती है। उनसे पहले सपनो के सौदागर, एक ही धुन में गाते हुए निकल जाते हैं- "जाना है मुझे दूर तक, कोई ना राह मेरा रोके। जाना है मुझे दूर तक, धुन मेरा छीने ।"
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