120Log inSign up
by Mohd Anwar Jamal Faizनव-ज्ञान
Details

जीवन की मधुता है इसमें -

दुख में भी मस्ती का गान;

रोगी जैसा ना कर जीवन,

मुखर प्रकृति से क्यूँ अंजान?


जीवन है, पढ़ हर वेद -

ऋषि मुनियों का ये ज्ञान;

नव-ज्ञान खोजे जो प्रति-छण,

बढ़ती रहती उसकी शान ।

Loading comments…