प्रकृति की इस हरीतिमा में
नवता का श्रृंगार भरा।
जाड़े की दोपहरी में जैसे
सूरज है नभ पर उतरा।
फैले आपके जीवन में
दिव्य किरण की ज्योति घनी।
बढ़ते जायें चढ़ते जायें
राह चलते सब अपनी-अपनी।
एकत्रित होकर मेघखण्ड
खुशियां बरसायें धारासार।
करती हूं प्रेषित यह संदेश
नए वर्ष में करें स्वीकार।
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