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Poem · Others

ओ री चँदनिया !

by Ankit Mishra ✓ · 1 Aug 2017

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मैं जागा रे |फूलों का पलंग है मेरा, सपनों की है चादर; बदली सा झूमता है मेरी माँ का आँचल ,,,,,,,,,,,, 

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ओ री चँदनिया ! · StoryMirror