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7 poems
गुनाहो का मसीहा
R S · 1 min read · 1.4K reads
गुनाहो का मसीहा लोग मुझें कहतें हैं, कभी शायर तो कभी कवि तो कभी मतलबफरोख्त कहतें है।
Drama
तुम खास हो मेरे लिए
Shirish Pathak · 1 min read · 63 reads
तुम खास हो मेरे लिए वैसे ही जैसे कड़ी धूप में छांव होता है!
Abstract
मेरी मां
Shaheen Ansari · 1 min read · 246 reads
मेरी मां तुम हम सबकी आंखों का तारा हो। जिसके बिना हर घर सुना हो।
Classics
तुम सा नहीं देखा
Preshit Gajbhiye · 1 min read · 198 reads
जो उम्र है मेरी , उस हिसाब से , सब देखा , मगर तुम सा नही देखा ...
Abstract
जुनून
Anshul Singh · 1 min read · 12.9K reads
थोड़ा बेचैन हूँ मैं,ज़रा सी प्यास मन में है।लौट कर गांव से अपने,सपनों के शहर में आया हूँ।
Inspirational
दुनिया के उस छोर तक
Ramesh Sawant · 1 min read · 13.5K reads
वो चलते होंगे वही राह जो तुमने और हमने रोज कई बार चली होगी, पर उनकी एक ही चाल काफी होती है उनके आसमां को बुलंद करने के लिए
Inspirational
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