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by Dr. Razzak Shaikh 'Rahi'फाइलें
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दफ्तरों के चक्कर लगवाती हैं फ़ाइलें

दीवाना आदमी को बनाती हैं फाइलें


बनना बड़ा ही मुश्किल होता है जनाब इनका

बन जाए तो दबी - छिपी रह जाती हैं फाइलें


कछुए की चाल चलना फ़ितरत हैं वैसे इनकी

थोड़े "वजन" से दौड़ती जाती हैं फाइलें


बाबुओं की सेहत से करती है खिलवाड़

दफ्तरों में धूल बढ़ाती है फाइलें


अफसरों से गर किसी ने ले लिया पंगा

फिर तो बड़ा ही नाच नचाती है फाइलें


इन फाइलों को यारों रुतबा बड़ा है हासिल

"किस्मत" बिगाड़ती और बनाती हैं फाइलें...!





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