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#philosophicalpoetry
530 poems
तय है
कुमार अशोक · 1 min read · 441 reads
हर बुलंद सफर का कभी तो विश्राम तय है।
Romance
मंजिल
Amit Sharma · 1 min read · 318 reads
एक मंजिल की तलाश में कुछ दूर चला आया हूँ मैं!
Abstract
हल्की हरारत है बदन में सुबह से
Prashant Bebaar · 1 min read · 113 reads
तुम देर रातां तक ख़यालों में दौड़ीं।
Abstract
दिसंबर के शहीद
Shantnu Barar · 1 min read · 13.9K reads
सुना है ईद आई थी कई लोग खुश भी थे हुस्न ओ कीमती लिबासों में बिखरे हुए मुबारकबाद देते थे कई हसीन हाथों ने मेहंदी भी सजाई थी
Others
ये मैं ही हूँ
Arti Varma · 1 min read · 7.3K reads
आखिर कौन है वो जो आईना पहने फिरता है
Others
वक़्त बड़ा मद्धम सरक रहा है
Prashant Bebaar · 1 min read · 130 reads
यहाँ तुझे भूलने की कोशिश में मैं वहाँ और याद आ रहा हूँ ।
Abstract
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