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#philosophyoflife
1937 poems
काहे रे मन
Gagandeep Singh Bharara · 1 min read · 230 reads
यह ज़िन्दगी इक सफ़र है, बस, मंज़िल भी हो, यह ज़रूरी तो नहीं।।
Abstract
गिलहरी
Rahul Shrivastava · 1 min read · 20.7K reads
इस दरख़्त कभी उस दरख़्त उछलें, कूदें फिर गिर जायें मन को आओ गिलहरी कर लें ||
Drama
कबीर
Anantram Choubey · 1 min read · 7.2K reads
कबीरा खड़ा बाज़ार में माँगे सबकी खैर...।
Drama
मुस्कुराहट
Rahul Shrivastava · 1 min read · 20.4K reads
वो जिनकी आँँखों में मायूसी के लिए कोई जगह ही नहीं अपनी पलकों में सिर्फ़ जुनून लिये वो लोग जहाँँ मिलते हैं कामयाब मिलते है
Drama
बालकनी, एक ऐसी जगह
dr vandna Sharma · 1 min read · 7.4K reads
जब शांत हो जाता है मन हल्का सा मुस्काते हैं और बतियाते हैं एक कप कॉफी लेकर बतियाती है उनके साथ बालकनी...!
Drama
'शराब' एक गम का प्याला
Robin Jain · 1 min read · 7.2K reads
आज भी तंग हैं बहुत, बहुत गम भी हैं जिस महफ़िल में हर शख्स अकेला होता है, जश्न मनाने उस महफ़िल में आज हम भी हैं...!
Drama
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