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4 poems
खाकीवर्दी की मनमर्जी
आदेश दुबे · 1 min read · 6.6K reads
खाकी वर्दी तेरी मनमर्जी ढाती जुर्म हजार है ए कैसा अत्याचार है ए कैसा भ्रष्टाचार है !
Crime
कोरोना कर्मवीर
Deepash Joshi · 1 min read · 23.2K reads
सोचा चलो देखते हैं इसे भी, इन हौसलों के आगे बड़ी कहाँ ये..
Abstract
मजबूरी
Vrajlal Sapovadia · 1 min read · 243 reads
मिल नहीं पाया बहुत ढूंढने पर मालूम न था की बच्चा गोदी में है।
Comedy
बेलगाम दिल्ली
Srijan Jha · 1 min read · 7K reads
जब रातों को कुछ दरिंदे सरे आम हो जाते हैं..
Comedy