by Raj Bairwa Musafir ✓ · 17 Jul 2017
धूल छड़ी इक किताब पुरानी, तेरी मेरी नज़दीकियों की वो कहानी, मिली थी कल तन्हा मुझे, ढूंढ रही शायद वो पुराने लफ़्ज़ों की रवानी,
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