by Lata Bhatt ✓ · 18 Apr 2019
परेशां हर दोराहे पे कश्मकश से , राह, राही, मंजिल मिले न आपस मे, वक्त की खिसकती रेत, बंद मुट्ठी रही, राह रूठी रहीं, हम से
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