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#rape
31 poems
बलात्कार के ख़िलाफ एक रचना
Ashish Aggarwal · 1 min read · 14.1K reads
कैसे ना भरोसा उठे उसका फ़ितरत-ऐ-इन्सान से, सभी फूल चुरा ले गया हो कोई जिस गुलिस्तान से।..........................
Others
बलात्कार
Goldi Mishra · 1 min read · 661 reads
गूंजती है आज भी फिज़ा में हजारों सिसकियां, घुट घुट कर तड़पती है इस समाज में बेटियां!
Tragedy
एक रेप पीड़िता की आवाज़
Prashant V Shrivastava · 1 min read · 8.5K reads
कराहती हुई रूह को सहलाते हैं खुदा करेगा इन्साफ ये समझाते हैं
Crime
लड़नी होगी लम्बी लड़ाई
Amrendra Suman · 1 min read · 7.4K reads
या जीना चाहते हो उन तमाशबीनों के लिये रहम की भीख मांगती जिनकी आँखोें के सामने गिड़गिड़ाती रही फूलमती और इधर हँसते रहे वे...
Crime
क्या यही भारत है !?
Pratyush Gautam · 1 min read · 487 reads
और कुछ बाकी भी है क्या, दरिंदगी की हद पार करने को !
Abstract
हैवान बने हो
Tanha Shayar Hu Yash · 1 min read · 7.5K reads
अपनी भूख मिटाने के लिए, हैवान बने हो...
Crime
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