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#rise
3 poems
आफ़ताब की सीढ़ियाँ
Abhivardhan I · 1 min read · 13.8K reads
यह सत्य है कि हर मनुष्य इस तीव्र गति से प्रगत्त होते संसार में अकेला है, भले उसके साथ उसके परिजन हों, पर वह मरहूम नहीं है।
Abstract
राइज अप यू!
Oshit Kul Ratan · 1 min read · 7.3K reads
यम भी झुकेगा हिमालय भी टूटेगा, तुम भीष्म की प्रतिज्ञा तो लो, तीन लोक भी तेरे होंगे, एकलव्य का निशाना अपना तो लो!
Inspirational
अनोखी जीत
Praveen Gola · 1 min read · 199 reads
देर रात को सोने का जो ये नियम बना है ,आधी बीमारियों का ये देह घर बना है.
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